चांद
Updated: Jul 21, 2025
By Meeta Rani Behera
चांद तुम कितने खूबसूरत हो !
कि हर किसी का दिल तुम पर आ जाता है ,
क्या यही तुम्हें आवारा बना देता है?
मैं पूछती हूं क्या यही तुम्हें आवारा बना देता है?
कभी तुम ईद के चांद ,
तो कभी करवा चौथ के चांद बन जाते हो,
तो कभी सुंदरियों के सुंदर मुखड़े में नजर आते हो,
चांद, फिर भी तुम हर किसी के दिल को भाते हो,
पूरे हो मगर ...
पर, बड़ी मुश्किल से पूरे नजर आते हो,
कभी बढ़ जाते हो, कभी घट जाते हो,
तो कभी पूर्णमासी का चांद बन जाते हो,
पर, धरती के लोगों को नजर भर देखने के लिए तरसाते हो,
चांद, तुम हो बड़े जिद्दी,
अपनी मर्जी से आते हो और चले भी जाते हो,
फिर अपनी उसूल, अपने विचार सबसे क्यों नहीं मानवाते हो?
कभी तुम हिंदु कभी मुसलमानी बन जाते हो,
जब चाहे अपना मजहब बदलते हो,
फिर इस धरती पर...
मजहब के नाम पर हो रहे दंगे क्यों नहीं रोकते?
क्यों नहीं उन्हें प्यार से रहना सिखलाते हो?
है खून का रंग लाल सब का एक,
फिर यह कैसा जाति भेद, यह कैसा है मतभेद?
तुम आसमां से यह नजारा देखकर मुस्कुराते हो,
जरा, अपनी मुस्कुराहट इन्हें भी सिखा दो,
आपस में दो दिलों को मिला दो,
बस, आज अपने प्यार की चांदनी में डूबो कर,
इन्हें अपनी तरह खूबसूरत बना दो।।
इन्हें अपनी तरह खूबसूरत बना दो।।
By Meeta Rani Behera

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