गाँव
By Dhruwa Shankar Prasad
हवा की ताजगी में
सूरज की लाली में
बारिश की बूंदों में
गुनगुनी धूपों में
नरम नरम घांसों में
कंकड़ों के अक्यू प्रेशर में
मंदिरों की घंटियों में
मस्जिदों की अजानों में
गुरुद्वारा की अरदासों में
चर्चों की प्रेयरों में
हरियाली नयनाभिराम में
मागाँवर्गदर्शन अविराम में
परिश्रम की प्रेरणा में
बुद्धिमनी भरी कृपणता में
संबंध संभालने की कुशलता में
प्रदूषण रोकने की व्याकुलता में
गाँव हमेशा धड़कता रहता है
रहूं कहीं भी, गाँव मेरे अंदर हमेशा रहता है !
By Dhruwa Shankar Prasad

गांव की याद आ गई
Nice poem
👍