खुशी
Updated: Oct 10, 2022
By Sakshi Begwani
कांच की इस दुनिया में
सच कहा किस्से दिखता है
दूसरों के हिस्से में खुशियां
खुदका सिर्फ गम दिखता है
आसान अगर होता जीवन
तो स्वर्ग धरती पर होता
क्रोध, मान, माया, लोभ
कभी यह नाम सुना न होता
लालच और भय से आज
दिखावे का जीवन जीते है
दूसरों को खुश करना ही
खुदकी खुशी समझते है
घुट घुट कर खुदको ही देखो
पिंजरे में बंद करते है
फिर खुद ही कहते है खुदा को
की तूने कितने गम लिखे है
दर्द होता ऐसे जीवन से
तो कलम तुम खुद उठाओ
खुशी जीवन में लानी होतो
पहले खुदसे प्यार जताओ
कीमत खुदकी पहचानो तुम
खुदको खुद का समय दिलाओ
यह जीवन बहुत छोटा है
इसे अफसोस में मत गवाओ
इसे अफ़सोस में मत गवाओ
By Sakshi Begwani

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