कोठा
- Hashtag Kalakar
- May 22, 2024
- 1 min read
Updated: Oct 3, 2024
By Anupriya Choudhary
चलो, आज मैं तुम्हें एक नई दुनिया से मिलाती हूं
प्यार, निर्मलता और खुशी से परे इसका नया चेहरा दिखाती हूं,
ये दुनिया यूं तो हमारे बीच है
पर इसे अनदेखा करना मानो हमारी अनकही रीत है।
यहां इंसान तो है पर इंसानियत नही
रास्ते तो कहीं है पर मंजिल वही,
बच्चे और बुजुर्ग सभी रहते हैं यहां
लेकिन ना बच्चों को मासूमियत है, ना बुजुर्गों का आशीर्वाद ।
अरे। नही , चौकना मत, तुम दुनिया का ये रूप देख कर
हां तुम से थोड़ी अलग है जरूर पर आखिर तुम्हारी ही है ये दुनिया ।
खेल-खिलौने नही, यहां हालात बिखते हैं
पालन-पोषण की खातिर यहां आत्मसम्मान बिकते हैं
शरीर के सौदागर यहां रूह भी कचोटते हैं
कड़वी हक़ीक़त यहां रहती है, ना कोई ख़्वाब पलते हैं।
अरे। नही, चौकना मत, तुम दुनिया का ये रूप देख कर
हां तुम से थोड़ी अलग पर आखिर तुम्हारी ही है ये दुनिया।
कोई बहन, कोई बेटी, कोई मां, यहां होती नही
चंद पैसों में यहां सभी रिश्ते नीलाम होते हैं,
लक्ष्मी, सरस्वती और दुर्गा रूपी कन्याएं तो यहां भी हैं
लेकिन ना मान ना सम्मान, यहां बस उनके जज़्बात तार-तार होते हैं।
इस बेरहम सी दुनिया के
तुम, मैं और हम सभी हिस्सा हैं ,
शशश...तुम चुप रहना किसी से कहना मत
आखिर, यह तुम्हारे समाज का काला किस्सा है।
By Anupriya Choudhary

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