कायर
By N Veyra
तुम नहीं जानते,
यह घुमते हुए पंखे की आवाज़
मेरे अंदर के तूफ़ान से मिलके
कितना शोर मचा देती है।
लोगो के लिए यह सिर्फ ठंडी हवा है,
पर मेरे लिए हर झोंका
एक यादों का बवांड़ा बन जाता है।
जब भी यह पंखा घूमता है,
मुझे लगता है जैसे ज़िन्दगी का पहिया
बिना रुके
बिना मुझसे पूछे आगे बढ़ रहा हो
और मैं
बस वही का वही रूककर
दीवार बन गया हू।
तूम शायद कहोगे
इतना छोटा सा पंखा तुम्हे कैसे डरा देता है?
पर डर पंखे से नहीं है,
उस ख़ामोशी से है
जो पंखा रुकते ही
कमरे में घुल जाती है
डर उस अँधेरे से है
जो दीवारों से टपक कर
मेरे सीने तक आ जाती ह।
हाँ,
शायद तुम मुझे कायर कहो।
कायर
क्युकी मैं छोटी छोटी चीजोंस से
बेचैन हो जाती हूँ
कायर
क्युकी मैं अपने अंदर की चीखों को
कभी ज़ोर से बोल नहीं पाती।
पर क्या कभी किसी ने यह सोचा
की चुप रहना,
अपनी पीड़ा छुपाना
सबसे बड़ी हिम्मत होती है?
लोग कहते है
डर का सामना करो
पर कोई यह क्यों नहीं कहता
की डर के साथ जीना भी तोह एक कला है
रात दर रात
पंखे की परछाइयों को देखना,
उस घूमती हुई छाया में
अपने टूटे हुए सपनो को
दोबारा जोड़ना,
क्या यह काम हिम्मत है?
By N Veyra

Good
Awesome
Be strong and never give up.
Understated and strong
Can’t believe you write so well