कब्र
Updated: Jul 16, 2025
By Chinmay Kakade
अपनी ही कब्र पर मैं सोया था
शरीर तो छोड़ दिया था पर रूह का क्या करे पता ही न था
सोचा था जन्नत नसीब होगी पर इस जहन्नम ने मुझे कहा छोड़ा
उठ कर देखा तो कुछ चार पांच फूल मेरी कब्र पर मिले
ऊपर देखा तो वह पेड़ एक मरे हुए को भी तकल्लुफ़ दे रहा था
कई दिनों बाद चैन की नींद सोया था पर इस बार उठना मुमकिन नहीं था
सारी यादें, वादे, कसमें और इरादे इस कबर में बंद पड़े हैं
ले जाने के लिए है तो सिर्फ कुछ किस्से और कहानियां
इश्क कभी मिला नहीं, पहचान कभी बनी नहीं
वह तो मानो जीते जी ही मर गए
तभी पड़ा हुआ हुं एक गुमनाम कब्र में इसी इंतजार में
कोई आए और इन दुखों की बेड़ियों में जकड़े हुए रूह को आजाद करें
By Chinmay Kakade

Comments