क़सम
Updated: Jul 18, 2025
By Kshitij Kawatra

क़सम आज ख़ुद से शदीद लीजिएगा
फिर किसी से ना कोई उम्मीद कीजिएगा
ना कोई क़रीब आ पाए अब इतना
ना एहसासात की ख़रीद कीजिएगा
ज़िंदगी में कोई ऐसा ना हो जिसके लिए
तमन्ना कोई अपनी शहीद कीजिएगा
दोस्त-दोस्त कहता हैं ये जहाँ मुस्तफ़ीद
ऐसे जहाँ से दूरी मज़ीद कीजिएगा
राहों में अंधेरा कोई नई बात तो नहीं
बस अब उजाला ख़ुद ही बन ख़ुर्शीद कीजिएगा
अपनी अना की तस्कीन के लिए
ना ख़िलाफ़ ना कोई अपने मुरीद कीजिएगा
ग़ैरांतमंदों की गर कमी है जो इर्द-गिर्द
तो ज़बाँ को अपनी ज़रा तमीज़ दीजियेगा
By Kshitij Kawatra

Comments