इश्क
By Vishvadeep Jain
क्या लिखूं इस इश्क पर जिसपर कोई बात नही होती है ,
ठहरते तो है पर अब बात नही होती ,
सपने संजोता है इश्क
पर कही बात पूरी नही होती ,
राहों मैं अधूरा छोड़ ,ये इश्क की कहानियां पूरी नही होती ।।
साथ निभाने के सपने जहा साकार होते
वहां पल भर मैं साथ टूटने की बात हो जाया करती है ,
जहा आज के जमाने मे इंस्टा फेसबुक से इश्क जताया जाता हो
वहा कहा कोई कहानी टिक पाती है ,
शब्दों ,पत्रों को छोड़कर जहा बस स्टोरीज दिखाई जाती हो,
चलते फिरते लोगो की वाह वाही की जाती है ,
क्या बात करू ऐसे इश्क की जहा एक पर भी नजर गड़ाए नही जाती है ।।
कहने को बहुत पर ,सुनने को कोई राजी नहीं है ,
जो साजी है सुनने को ,उसके पास वक्त की नसाजी नही है,
लिखने को तो लिख दोगे हजार पत्र इश्क की कहानी मैं ,
पर पड़ने वालो की गिनती आज कही से आती नही,
धोखा बेवफाई तन्हाई हर पल जिसके सम्मुख चलते हो ,
ऐसी इश्क से आस लगाई जाती नही,
क्या कहूं ऐसे इश्क पर जहा पर बातें बताई नही जाती हैं,
बेवफाई को दौर मैं वफाई देखी नही जाती ,
इसीलिए कहता हु की रहा नही अब वो दौर
जहा पत्रों से खेला जाता था ,मौन अधर और कोरा कागज़ सबकुछ बयां कर जाता था ,
कहने को बात नही आंखो से बात समझते थे
वो इश्क ही अब कहां जहां अक्सर इश्क में डूब जाया करते थे ।।
By Vishvadeep Jain

Loved the lines ....❤️
nicee !! 👀
बहुत खूबसूरत लिखा है ✨🖋️
❤️❤️
Loved the way you written ..