आसरा
By Gaurang (Gaur_Mats)
मुझे मिला था एक आसरा अपनी शुरुआत में। उस आसरे को मैंने धीरे धीरे मेहनत और पैसे से अपना बसेरा बनाया है। लेकिन यहाँ तो बस इतना ही रहता हूँ मैं कि कहीं अकेलेपन की आदत ना पड़ जाए। ऐसा करते करते दिन बीत ही जाता है अक़्सर। पर क्या है ना अकेलापन पीछा छोड़ता ही नहीं। इसीलिए मैं अक़्सर उम्मीद करता हूँ कि कहीं से आकर तुम मेरे इस बसेरे को एक आशियाना बना दो ताकि मुझे फिर कभी अकेलेपन से पीछा छुड़ाने के लिए यहाँ से दूर जाना ना पड़े।
By Gaurang (Gaur_Mats)

Comments