Lori
Updated: Aug 2, 2025
By Bhagat singh
अखियन में निंदिया को लाओ जी
पलना में चंदा सुलाओ जी
आओ अब तो तनिक बैठो
पास अमियाँ छांव में
रात के इन जुगनुओ से
जगमगाते गाँव में
चहु ओर फैले
आलसी अँधियारों को चमकाओ जी
अखियन में निंदिया को लाओ जी
पलना में चंदा सुलाओ जी
थाली भरे पानी में पड़ती
चाँद की परछाया
पेड़ बैठे मोर ने ये राग कैसा गाया
मिलो और मिल
राग से इस अपना राग मिलाओ जी
अखियन में निंदिया को लाओ जी
पलना में चंदा सुलाओ जी
सिर बांध गमछा भोर होते ही चला
खलिहान में हल हाथ डोले
हलधर हथेली ताकता
किस्मत लकीरे बात बोले
जो मिल सका ना
हक पसीने का हमें दिलवाओ जी
अखियन में निंदिया को लाओ जी
पलना में चंदा सुलाओ जी
जिसने फुदक कर घर बनाया
वो चिरैया पास है
फैलती इस पंखुड़ी में
शिक्षा रूपी सांस है
देशहित मे स्वजन
सारी बेटियों को पढ़ाओ जी
अखियन में निंदिया को लाओ जी
पलना में चंदा सुलाओ जी
जात क्या और पात क्या
इंसान की औकात क्या
ये जाने बिन, ये माने बिन
मिल बढ़ चलो तो बात क्या
छोड़ आपा
इंसान को इंसान समझे जाओ जी
अखियन में निंदिया को लाओ जी
पलना में चंदा सुलाओ जी
देश का माँझा जो
आए हाथ में तो ढील देना
फिर उड़ारी ले नया
विश्वास भरती नींव देना
सब साथ चल
उम्मीद के बुझते दिये को जलाओ जी
अखियन में निंदिया को लाओ जी
पलना में चंदा सुलाओ जी॥
By Bhagat singh

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