सफर
By Akanksha Singh
सफर में अक्सर मुख़्तसर दिन, बड़ी रात हुई
दश्त-ओ-दरख़्त तकते रहे, मगर ना बरसात हुई
नज़र उठा के देखा मैंने हर सम्त
नज़र ना आया कोई, जाने क्या बात हुई
एक ख़्याल को शिकायत थी, ख़्याल करने बैठे
एक लम्हा, एक दिन नहीं, उम्रभर की बात हुई
तूफान उठा, आँधियों ने खूब ज़ोर लगाया
बिजली पे बिजली गिरी, लो एक नई वारदात हुई
चलो कर लो बात तुम भी हद की
आज, कल, पड़सो, जाने कब फिर मुलाकात हुई
By Akanksha Singh

Fabulous ❣️
Beautiful ❤️❤️
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Loved every line!
So well drafted the thoughts...