मैं
By Pratibha
रिश्तों को अहंकार की ज्योत में ना जलाना,
ये आग लगा देगा, तुमको यूं पिघला देगा,
और
जैसे जैसे ‘मैं’ कि राख में दबते जाओगे,
वो एक शब्द जो कहना था इतना भारी हो जायेगा,
होंठों से सिल जायेगा न हि अधरों से फिसलेगा, ना ही आँखों से बाहर आएगा,
बस तुमको यूं हि बेबस तन्हाई में अन्दर ही अन्दर खायेगा,
तुम यूं खोखले हो जाओगे,
ख़ुद की साँसो से दर्द छुपाओगे,
रातों के घुप अन्धेरे से जब ज्यादा कालिख हो जाओगे,
बस तब एक अहसास तुमको सतायेगा वो एक शब्द,
इतना होने का इंतजार ना कर अगर मायने रखता है वो तेरी जिन्दगी में,
तो पुकार ले और थाम ले,
यूं मद को ना बढ़ाना,
रिश्तों को अहंकार की ज्योत में ना जलाना
By Pratibha

Comments