मां
By Mahaveer Singh Tanwar
शत शत नमन है मां तुमको
तुम फूलों की फुलवारी हो।
देकर जन्म हमें धरती पर
(इस) जग में सबसे न्यारी हो।। 1
सबसे पहला दुनिया में
स्पर्श तुम्हारा ही पाया।
जो तुम पीती थी हम पीते
तुम जो खाती हमने खाया।। 2
उदर तुम्हारे के भीतर ही
मखमली बिछौना था पाया।
अंतरतम में भी हे ममता !
हमने कष्ट कभी ना पाया ।। 3
जीवन का पहला ही पहला
एहसास तुम्ही से था पाया।
तुमने ही तो सबसे पहले
(था) हलचल करना सिखलाया।। 4
प्रथम दिवस पर जन्म के अपने
इस दुनिया को जब देखा।
सुकूँ मिला था उस पल ही माँ
आँचल प्यारा जब देखा।। 5
अपनी ममता के आंचल से मां
हमें पालन-पोषण तुमने दिया।
हुनर कदम की ठुमकन का भी
तुमसे ही तो हमने लिया।। 6
डगमग करते कदम हमारे
ठुमक ठुमक चलते चलते।
बिन तेरे आँचल के सहारे
माँ कैसे ये पैर निकलते।। 7
आँचल के अमृत से हमारा
शैशवकाल अमीर बना।
दिन परदिन की देखभाल से
सीना फौलादी वीर बना।। 8
बचपन में हमें नींद सुलाने
(तुम) लम्बी रात जगा करती।
बिस्तर की सीलन को हटाने
तुम तो तत्काल लगा करती।। 9
बड़े भले ही हम हो जाएं
तेरे तो मां बच्चे हैं।
लाख बुरा कहें दुनिया वाले
तेरे लिए तो अच्छे हैं।। 10.
भला हमारा करने को
बापू का साथ रही देती।
तेरी मेहनत के बल से भी तो
चमक रही थी यह गृहस्थी।। 11
बोल बता माँ कहाँ से सीखा
इतना प्यार लुटा पाना।
अपने बच्चों के सुख खातिर
इतना कष्ट उठा जाना ।। 12
रचनाकार –
महावीर सिंह तँवर
By Mahaveer Singh Tanwar

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