माँ
By Suhani Gupta
माँ बच्चे का पहला जहाँ,
माँ बच्चे की पहली सहेली,
माँ बच्चे का पहला घर,
सब जब लगे एक मुश्किल पहेली।
है वह एक अकेली शख़्स,
जो हमेशा साथ हो खड़ी,
समय आने पर तो वह,
भगवान से भी लड़ पड़ी।
ख़ुद चाहे जितना डाँटे,
ख़ुद चाहे कुछ भी कहे,
पर अपनी संतान के ख़िलाफ़,
एक भी उँगली न उठने दे।
हमारी जैसी संतान के लिए,
माँ ने क्या कुछ नहीं किया,
एक हम ही बेवफ़ा निकले,
इस प्यार का कैसा सिला दिया।
कपड़े वहाँ तो जूते यहाँ,
पूरा कमरा बिखरा हुआ,
बदतमीज़ी का तो जैसे,
हमें अधिकार ही है मिला हुआ।
चाहे जो भी हो,
माँ के लिए तो बच्चा आँखों का तारा है,
मगर आज यह तारा,
अपनेआप से हारा है।
लेकिन कहते है न,
देर आए दुरुस्त आए,
तो फिर चलो,
माँ के चरणों में गिर जाएँ।
क्यों ? क्योंकि माँ के चरणों में स्वर्ग है ,
और माँ दुनिया की सबसे ताकतवर शक्ति,
इसका साथ हो तो,
कौनसी मुश्किल हल नहीं हो सकती?
By Suhani Gupta

Evoked so many emotions!
Beautifully written
My mother is my role model
mothers really are the backbone of our existence. truly touching and beautiful. well done!
खूबसूरत लिखा है!