भूख
Updated: Jul 18, 2025
By Dr. Devendra K Prajapati

भूख बेरहम है, बुज़दिल है,
और जल्लाद भी।
भूख कुछ कहती नहीं,
सुनती नहीं,
भूख बस लगती है,
कुछ भी खाने को।
भूख का मारा हुआ,
भूख का रौंदा हुआ,
निगल जाता है,
राम को रहमान को।
जिस्म हार गया,
भूख की तकरार से।
भूख है भिडी हुई,
हाँफती हुई, काँपती हुई,
कभी कभी,
लड़खड़ाती है,
घबड़ाती हुई।
भूख के उस जोर से,
भूख ने भी कसकर पकड़ा,
जिस्म का वो खालीपन,
नहीं छोड़ेगी,
मौत उसको,
चौखट पे कबसे है खड़ी,
आज की रात न जाने क्या हो?
भूख है खड़ी हुई,
आज की रात न जाने क्या हो।
By Dr. Devendra K Prajapati

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