बोझ
By Smita Chaudhary
जानें क्यों एक बोझ सा
हर वक़्त दिल पे रहता है,
अब तो ये कोई बात किसी को
कहने से भी डरता है।
इसीलिए दिल की बातें
अब लफ्जों में पिरोती हूँ,
फिर लफ्जों की उन लड़ियों को
कागज पे संजोती हूँ।
रोती हूँ, चीखती हूँ और
गुस्सा भी उतार देती हूँ,
यूं अपने मन की सारी मै
भड़ास निकाल देती हूँ।
इस तरह से दिल को पर
सुकून बहुत मिलता है,
और कागज को न कलम को
कुछ बुरा लगता है।
By Smita Chaudhary

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