“नदी”
By Dr.Megha Soni
कहते हैं ,
है वो नदी सी ,
अल्हड़ , मदमस्त , बेबाक
उसे न किसी से लेना देना,
समुंदर है ,
अडिग , विराट, अपने ठहराव के साथ ,
पर,
भूल रहे हैं आप ,
वो नदी है ,
उसे एक दिशा मे है जाना ,
करने पूरा सपना ,
वो निकली है लक्ष्य पर ,
उसे नहीं भटकना, रास्ते हैं भीषण पर,
उसे पता है वो हर हाल मे जाएगी ,
किसी और को महान बनाने ,
आज वो स्वयं समर्पित हो जाएगी ,
स्वयं समर्पित हो जाएगी .
By Dr.Megha Soni

Comments