तुम
By Vikas Rajoriya
और इन आँखों की भोली सी, मासूम सी, पाक सी, स्वामिनी हो तुम, तुम और सिर्फ तुम
मय्यसर नहीं होता हर किसी को हुस्न का तोहफा, बहुत ही नयाब होता है ये तोहफा
जब खुदा की कारीगरी खुदा के दिल में बस्ती है,तब वो तस्वीर जिंदा होकर दुनिया में आकर सजती है
वो जादू है तेरी हर अदा में की फाख्ता होश हो जाते है तुझसे मिलने वाले तुझमे ही खो जाते है
अदायो के सताए हुए है ए अप्सरा खुद हम और इस हसीन सितम को धाने वाली हो सिर्फ तुम
By Vikas Rajoriya

Comments