गज़ल
Updated: Oct 5, 2024
By Sushma Vohra
ए मोहब्बत तूने जख्म है कितने दिए ,
तरकश में मेरे सब आंसू है,खत्म किए ।
करे कोई बेवफाई , दर्द सहे दिल-ए-नादान ,
क्यूं करें इंतजार, धोखा देना फितरत-ए-इंसान।
ए दिल संभल, जो साथ है गौर कर,
शबनम की बूंदों से खुद पर रहम कर।
उसे न आना था, ना रहेगा यादों में,
उठ तू चल सितारों की छत्रगाह में।
सकून नहीं वहां , चिलचिलाती धूप है।
धूप से छाया दूर नहीं,दरखत यहां बहुत है।
बदल नाम बेवफा का, खुद से मोहब्बत कर ।
जीवन को अपने , खुदा के सुपूर्द कर।
By Sushma Vohra

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