कुछ
By Siddharth Surana
कुछ कहे बिना ही सुनते है ना ,
कुछ बयां करे बिना ही समझते है ना,
कुछ वादें किए बिना ही निभाते है ना ,
कुछ मुक्कमल करे बगैर ही हासिल करते है ना ,
कुछ माँगे बिना ही पाते है ना,
कुछ दूर रह कर भी करीब आते है ना,
किसी सुने कमरे में साहिल को मेहसूस करते है ना,
कुछ रातों को ख़्वाबों में सजाते है ना,
हाँ आओ मिलकर यह समझोता करते है ना ,
कुछ मुहब्बत करें बिना ही प्यार जताते है ना,
कुछ मुहब्बत करें बिना ही प्यार जताते है ना||
By Siddharth Surana

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