काम
By Monica Banerjee
दो छोटी कविताएँ
नरुदा या गुरुदेव की उत्कृष्ट कृतियाँ
अख़मतोवा और बर्लिन पर आलेख
ज़िंदगी नामक रंगमंच पर लिखा गया कोई गीत
ग़र यही मुझे फिर से बुलाने का बहाना होते
ग़र यही मेरा इंतज़ार कर रहे होते
मैं दौड़ी चली आती
हर गली-कूचे को नापते हुए, अग्नि और आँधी पार करते हुए
आज तुम कहते हो कि तुम्हें सिर्फ “काम” बातियाना है
यह तुम कहते हो, मैं नहीं!
क्या मेरा तुम्हें संगत देना ही ‘काम’ नहीं है?
मेरा सविनय निवेदन क्यों ना हो?
कि इस ’काम’ की लय और गति भी मैं ही चुन लूँ!
नरुदा के बिना, गुरुदेव से विहीन
जीवन रूपी संगीत को छोड़
एक शिथिल, बोझिल गति ही क्यों न मेरे और तुम्हारे काम का हिस्सा हो?
By Monica Banerjee

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