कसक
By Garima Bajpai
जिंदगी के हर पन्ने में कसक अभी बाकी है
सपनो की आज भी कई उम्मीदें बाकी है
प्रेम की उम्मीदों का मिलन अभी बाकी है
सहमें - सहमे से कई अंदाज अभी बाकी है
धोखे के रिश्तों का मुखौटा हटाना अभी बाकी है
उम्र के हर दौर में संभल जाना अभी बाकी है
कुसूर चाहे जिसका हो जिक्र अभी बाकी है
कुसूर वालों के दामन में दाग अभी बाकी है
कामयाबी की हर सीढ़ी चढ़ना अभी बाकी है
उसपर अपनों का दरारे डालना अभी बाकी है
झूठी उम्मीदों से खुद को बहलाना अभी बाकी है
आइने में खुद को पहचानना अभी बाकी है
जिंदगी को जीने लायक बनाना अभी बाकी है
हौसले बुलंद रखकर दरारे मिटाना अभी बाकी है ||
By Garima Bajpai

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