कलम
Updated: Oct 10, 2022
By Sakshi Begwani
एक लखक के पीछे
कितना सारा दर्द छुपा है
कितना कुछ सहना पड़ता है
केवल उस कलम को पता है
आसान नहीं होता जीवन
मरना तो फिर भी सुगम है
जीवन में तम छाता है
तब जाकर लेखक बनता है
कोई अपना गम छुपाता
तो कोई दुनिया से डरता है
कोई ढूंढे सेहाई में हिम्मत
तो किसी किसी का दिल डूबा है
अवसाद के गड्ढे में कई गिरे है
सबने अपना अपना गम पिया है
पर सोचा कभी उन अपनो का
तुम्हारा यह दर्द जिन्होंने जिया है
अपनो को यूं तड़पता देख
कितनी तकलीफ होती है
बड़ाने के लिए हिम्मत को
खून का आंसू पीना पड़ता है
दुखी तुम होते हो पर
कलेजा अपनो का रोता है
शायद मारी ही कोई गलती होगी
खुद से नफरत करता है
बचपन की वो नफरत थी
जिसने लिखने का हुनर दिया है
आवेग में लिखना शुरू किया था
आज उसी तूलिका से रंग भरा है
साथ छोड़ जाते सारे
तब कलम साथ निभाती है
मेरे दुखड़े सुनती है और
हिमात भी बड़ाती है
कल की बात बहुत पुरानी
पर आज भी आसान नहीं है
डर लगता है कल क्या होगा
बस कलम पर आस टिकी है
बस कलम पर आस टिकी है
By Sakshi Begwani

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