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कलम

Sep 29, 2022
1 min read

Updated: Oct 10, 2022

By Sakshi Begwani





एक लखक के पीछे

कितना सारा दर्द छुपा है

कितना कुछ सहना पड़ता है

केवल उस कलम को पता है


आसान नहीं होता जीवन

मरना तो फिर भी सुगम है

जीवन में तम छाता है

तब जाकर लेखक बनता है


कोई अपना गम छुपाता

तो कोई दुनिया से डरता है

कोई ढूंढे सेहाई में हिम्मत

तो किसी किसी का दिल डूबा है





अवसाद के गड्ढे में कई गिरे है

सबने अपना अपना गम पिया है

पर सोचा कभी उन अपनो का

तुम्हारा यह दर्द जिन्होंने जिया है


अपनो को यूं तड़पता देख

कितनी तकलीफ होती है

बड़ाने के लिए हिम्मत को

खून का आंसू पीना पड़ता है


दुखी तुम होते हो पर

कलेजा अपनो का रोता है

शायद मारी ही कोई गलती होगी

खुद से नफरत करता है


बचपन की वो नफरत थी

जिसने लिखने का हुनर दिया है

आवेग में लिखना शुरू किया था

आज उसी तूलिका से रंग भरा है


साथ छोड़ जाते सारे

तब कलम साथ निभाती है

मेरे दुखड़े सुनती है और

हिमात भी बड़ाती है


कल की बात बहुत पुरानी

पर आज भी आसान नहीं है

डर लगता है कल क्या होगा

बस कलम पर आस टिकी है

बस कलम पर आस टिकी है



By Sakshi Begwani




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