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औरत

Apr 12, 2024
1 min read

Updated: Jul 18, 2025

By Sarthak Gupta


औरत

सुनी होगी बहुत सी कहानियाँ

लेकिन उस औरत की दास्तान कोई नहीं जानता

बचपन से ही अपनी मुलायम पलकों के तले कुछ सपने संजो तो लेती है

पर कुछ ही खुशनसीब होती हैं जो उन सपनों को जी लेती हैं

पापा की परी कहो या कहो मम्मी की दुलारी

चाहे कितना मज़ाक बना लो उसको हमेशा हस के सह जाती है नारी

रो कर व्यक्त करती है अपनी भावनाओं को लेकिन दिल से है मज़बूत

पौधे की तरह सींच कर रखती है हर रिश्ता जिसमें पड़ना जाएँ फूट

चाहे मर्द में हो कितना ही गुरूर

महिलाएँ हमेशा ही रहतीं हैं एक कदम आगे तोड़ कर उनका तकब्बुर

आज कदम से कदम मिला कर चल तो रही है

लेकिन फ़िर भी खुद में ही कही खो रही है

इसलिए तो चाहे वो श्री राम हो या हो श्री कृष्ण की कहानी

औरत के बिना तो अधूरी है उस प्रभु की भी ज़िंदगानी

तो फ़िर सोच के देखिए आप कौन है और आपका नाम है क्या

उस औरत के बगैर आपकी पहचान है क्या

माँ कहो बेटी कहो या कहो दोस्त

पूरे ब्रह्मांड का यहि है असली स्त्रोत यहि है असली स्त्रोत।


By Sarthak Gupta


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