आदत
By Vansh Sahni
गम नहीं है मुझको अब तुम्हें न पाने का,
कुछ कहे बिना बस यूँ ही चले जाने का।
गलती तो मेरी थी, जो वादा कर बैठा था मैं, तुम्हें खुद से भी ज़्यादा चाहने का।
यादों में है मेरे, तुम्हारा यूँ बालों का सहलाना।
अपनी मधुर वाणी से इस दिल को बहलाना
अब तुम नहीं, तो इन्हीं यादों को दफ़नाकर सीने में
आदत बना ली है बस इन्हीं के साथ जीने की।
By Vansh Sahni

Comments