आदत
- Hashtag Kalakar
- Aug 16, 2025
- 1 min read
By Bansari Pritesh
अलमारी में पड़े उस सामान में धूल जम जाएगी...
तू याद न बन, यादों की किताबें बंद रह जाएंगी...
आ आकर मना ले मुझे—आज लिख रही हूं,
हो सकता है कल से मैं मौन रह जाऊँगी...
अगर यूं हुआ तो कोरा कागज़ भारी बड़ा लगेगा,
आंखें मेरी चुप बहुत हैं—ढूंढ ले मुझे, नहीं तो खो जाऊंगी।
By Bansari Pritesh

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