आदत
Updated: Jul 16, 2025
By Ruta Joshi
होशो-हवास में लगे वह अनजानी लत हैं आदत,
कह गया हैं कोई ,मोहब्बत से ज़ालिम हैं आदत !
फ़िज़ूल ही तुम्हारा इंतज़ार करना हैं आदत
तुम ग़ौर हमे करो,वो हर कोशिश हैं आदत
प्यार को फ़र्ज़ी बताकर ,ख़ुद से धोका हैं आदत
हवस के नक़ाब में चाहत छुपाना हैं आदत
तुमपे ख़ुद्दारी लुटाकर ,फ़क्र करना हैं आदत
तुम्हारी हर ना को, हाँ सुनने की बेबसी हैं आदत
काग़ज़ पर लफ़्ज़ बयाँ कर ,तुम्हारे लिए रोना हैं आदत
फ़सानों को ख़्वाबों में जीकर तुम्हें पाना हैं आदत
झूठे बहानों को सच मानने की फ़ितरत हैं आदत
सब कुछ समझकर नादान रहने की ज़रूरत हैं आदत
मोहब्बत मिले जो ख़ुशनसीब को, तो जायज़ हैं आदत
वरना तन्हाई में जिंदा रहने की लाचारी हैं आदत !
By Ruta Joshi

Comments