अलग
By Ravi Soni
दुनिया से अलग , मुझे मेरे तरीको में रखा जाए
दुनिया रहे अपने मे , मुझे मेरे सलिको में रखा जाए
चाल चलन मेरी तय करने वाली तुम कौन दुनिया ?
मुड़कर जवाब नही दिया मैंने अब तक , मेरी खामोशी को बगावत समझा जाए
बर्बाद होता हु तो होने दो , मुझे बर्बाद रखा जाए
मरता हु तो मरने दो , जब तक मर न जाऊं मुझे आज़ाद रखा जाए
अनावश्यक अनचाहे रूढ़िवादी विचारो से आज़ादी मांगना अगर गुनाही है
तो मुझे एक हिस्ट्रीशीटर गुनहगार समझा जाए
लिखावट नही महज़ यह मेरे अंदर की क्रांति है ज्वाला है
मेरे एक एक शब्द को अंगार समझा जाए
रंग , जाती , सम्प्रदाय के खुंखार जंगल के परे है एक इश्किया इंसानी बस्ती
बस मुझे उसी बस्ती का इंसान समझा जाए
दुनिया से अलग मुझे मेरे तरीको में रखा जाए !
By Ravi Soni

Comments