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Maa

Jul 15, 2024
1 min read

Updated: Oct 5, 2024

By Shweta Kumari



Maa

वो कल भी बच्चे संभालती थी,

वो आज भी बच्चे संभालती है |

कल मुझे संभालती थी,

आज मेरे अंश को संभालती है |


उम्र उसकी भी हो चली है,

पर सेवानिवृत नहीं हुई |

चेहरे पर झुर्रिया आ गई,

पर वो मुस्कान धूमिल नहीं हुई |


कुछ नया सीखने को,

आज भी उत्साहित रहती है |

क्या नया कर दूं बच्चों के लिए,

इसी उधेड़बुन में दिन भर रहती है |


मन सोचता है बार बार,

कैसे कर लेती हैं इतना कुछ,

मैं तो थक जाती हू एक ही बार |

सच है ऑफिस नहीं जाती थी,

पर २४ घंटे परिवार को समर्पित थी |


झुंझला कर जो कह देते सब,

आप कुछ नही समझती |

घर के बाहर की दुनिया क्या है, 

आप कुछ नही जानती |


हर बार नम आंखों से बस मुस्कुरा देती,

वो दर्द आज समझ पाती हूं |

जब इतना कुछ कर के भी, 

परिस्थितियों से हार जाती हूं |


हर किसी को सेवानिवृत मिलती है,

पर वो मरते दम तक कार्यरत ही रहती है |

सच है वो मां है ,वो कभी नही थकती है,

हार जाते है इंसान पर मां कभी नही हारती है |


By Shweta Kumari



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