Maa
By Ekta Arora
माँ शब्द नहीं एहसास है
जो इंसान नहीं भगवान है
ममता की जो मुहूर्त है
बिन बोले जो समझ जाए जो वो सूरत है
दुआओं का पैगाम है जो
हमारा अभिमान है वो
जो केवल सर का ताज नहीं
सारा जहान है जो
मोल नहीं है जिनका
क्यूंकि अमूल्य है उनका रूप
जिनका होना ही स्वर्ग से कम नहीं
जो हर दर्द को समझे वो मूर्त है
चाँद से सुंदर और तारो से चमकती पहचान है जिसकी
वो माँ नहीं पूरा संसार है
By Ekta Arora

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