Maa
By Bhavya Singh
जब मैं खुद खुदको समझ में नहीं आता हूं
तब तुम्ही मुझको समझ पाती हो
चाहे सही हो या हो गलत मेरी हर बात में हा में हा मिलाती हो
तुम्हारा होके भी तुमको वक़्त नी दे पाता हूं
लेकिन फिर भी तुम इसके लिए मुझे कभी अकेले छोड़ कर नहीं जाती हो
एक तुम्ही तो हो जो हर बार मुझे समझ पाती हो
तुमसे शुरू हूं
हूं तुम्ही पर ख़तम
मेरे सारे दर्द चुटकियों में हो जाते है ख़तम जब तुम कुछ यूं खुलकर मुस्कुराती हो मां तुम्ही तो हो जो मुझे समझ पाती हो
By Bhavya Singh

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