Maa
By Asheshwar Saw
जो तेरी रूह का मैं दर्द ना समझ सका ।
जो तेरी नजरों का मैं प्यार ना पड़ सका तो जिंदगी मेरी किस काम की मां बस नाम की।
पलकों के साए में तेरी दोनों जहां मेरा बस्ता मानो ना मानो मां मेरी तुझमें खुदा मेरा रहता जो तेरी पावों का आहट मै ना सुन सका जो तेरी नजरों से ओझल मैं हो गया तो जिंदगी मेरी किस काम की मां बस नाम की मन की बातें सारी जाने तु सारी ख्वाहिशें मेरी ।
मैं कहूं या ना कहूं मां तुझे है पता मेरी।
चुन बिन कर खिलाए जो दाने मुझे और मैं देखा सारा जहां ।
नाकामियों के थपेड़ों से झुलसती मेरी आंखें ढूंढे बस मां तुझे मेरी ।
वक्त के पहियों के आगे मैं तुझे ना देख सका तो जिंदगी मेरी किस काम की मां बस नाम की ।
By Asheshwar Saw

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