तू
By Pratibha
मेरी आयतों के सर्द नजारों में नहीं तू तो किधर होगा,
मेरी बेचैन सादर्द रातों में नहीं तू तो किधर होगा,
ये चुभती खामोशियों की रंजिशों में नहीं तू तो किधर होगा,
अश्ककुप में दबी घुप घहरायी के एहसास में भी देखा तुझे
आईनों से झांकती गमगीन सदाओं में नहीं तू तो किधर होगा,
हर अलक में मुझसे विरक्त होगा भी क्या,
आग की लपट को संजोती इन गीली साँसो में नहीं तो तू किधर होगा।
By Pratibha

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