घर
By Vishvadeep Jain
अकेला बैठा था घर पर
पीछे से एक आवाज आई
की भाई कहा जा रहा है
यूं मुझको अकेला छोड़ तू किधर भाग रहा है ,
तो मैंने जवाब दिया उसको
की ए घर तूने मुझको बहुत है दिया ,
मैं वो कभी भूल ना पाऊंगा
वापस आने का वादा तो नही
पर समय समय पर तुझे संभाल जरा जाऊंगा ।।
तूने मुझको आशियां दिया
मैं भीगू ना बारिश मैं तूने मुझको छत दी
मेरा मौज भी तूने देखा
तो मेरा रोना भी तूने देखा
मेरा खेलना भी तूने देखा
तो मेरा कूदना भी तूने देखा
देखा तूने छोटे से बड़े होते हुए मुझे
और मैंने देखा तुझे जवान से बूढ़े होते हुए
बस तेरे पास यूं ही रहना चाहता हु
पर क्या करू आगे फर्ज़ भी निभाना चाहता हूं
कहता हु बात वोही की वादा आने का तो नही
पर हां समय समय पर संभाल जरा जाऊंगा ।।
तूने मेरा खयाल रखा
बचपन से जवानी तक
अब रखना तू खयाल अपना
झुकते उम्र के पड़ाव मैं
देखा तूने बहुत है
फूले फले से तू सुनसान हुआ
मैं कहता तुझे बस इतना सा हूं
की दिल मैं हैं बस तू बसा हुआ
खयाल रखना तू अपना
मैं हूं हमेशा साथ तेरे
वादा तो नही करता वापस आने का
पर समय पर संभाल जरूर जाऊंगा ।।
तो घर ने मुझसे ये कहा
की हां तू अपने रास्ते पर
मैं यहां पर अपना खयाल रखूंगा
तू रखना खयाल अपना
और पूरे करना सपने अपने
मैं हूं यहाँ पर संभाल लूंगा
अकेला ही सही पर वक्त निकाल लूंगा
बस रखना मुझको याद तू
और आना एक दिन और कहना मुझसे
की ए घर है तुझे एतबार खूब
की ए घर है तुझसे एतबार खूब ।।
By Vishvadeep Jain

Felt every word of it ..👏❤️
Ghar wali feel ...
Bestttt linesss 💯 ♥️