घर
Updated: Jul 15, 2025
By Aarti Priya
घर, क्या है आखिर ये घर ?
ईंट और पत्थर से बना दो मंजिला या चलो तीन मंजिला?
आम जिंदगी में और लोगों के हिसाब से तो यही है घर ,
पर एक कवि के नजरिए से
घर वो है , जहाँ प्रेम हैं
जहाँ लोग हैं , जहां अपनेपन का एहसास हैं
जहाँ बस हर थके हुए दिन के बाद आप जाकर सिमट जाओ
जहाँ बस सुकून मिले और हाँ जहां बस वो दो पल का एहसास हो
एहसास उन दो दिलों के धड़कने का
एहसास उस अपनेपन और प्यार का ।
घर सिर्फ घर नहीं घर एक इंसान भी हो सकता ,
घर ईंटों से बना दो मंजिला और तीन मंजिला नहीं
बल्कि वो एहसास प्यार और अपनेपन का है
घर एक सुकून है उन बाहों का ।
तब घर घर लगता है ।
तब घर घर लगता है।
By Aarti Priya

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