आग
Updated: Jul 18, 2025
By Dr. Devendra K Prajapati

आग में देखा है,
आग को जलते हुए,
आग को जलाते हुए,
आग से आग बनते हुए|
आग जलाती है,
आग धुंआ करती है,
आग बुझती है,
आग बुझाती है,
आग मिटती है,
आग मिटाती है|
आग ही वो तेज़ है,
आग ही वो शेष है,
जो जल रहा अंगार में,
जला रहा प्रतिकार में,
आग की विभीषिका राख को बुला रही,
राख है बना रही उस अस्थि के अस्तित्व को,
राख है दिखा रही अनादि काल अंत को,
आग ही प्रकाश है जो जल रहा उस दीप में,
लड़ रहा उस काल से, विकराल से अंधकार से।
By Dr. Devendra K Prajapati

Comments