“पल”
By Dr.Megha Soni
कुछ भी नहीं ‘अगले पल ‘ जैसा ,
पल भर जब भी मैं सोचने बैठु ,
पल ही भर मे निकल जाता है ,
वो पल जैसा ,
बीतते जाएंगे पल -पल करते ये पल ,
न करूँ में इंतेजार इन बीतते हुये
पल जैसा ,
जो करना है आज ही करना है,
जो जीना है आज ही जीना है ,
कल के हसीन पलों के सपनों मे ,
आज बन न जाऊँ ,
में भुला दिये किसी पल जैसा .
By Dr.Megha Soni

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