।मासूम मोहब्बत।
By Aishwarya Sharma
रोके रखूँगा हँसी अपनी,नादानियाँ तुझसे करवाऊँगा।
जब भी तु मिलने आएगी,मैं रूठा सा बैठ जाऊँगा।
जो ना भी फँसी फिर ज़ुल्फ तेरी,तो भी मैं,जां रूक जाऊँगा,
आकर करीब फिर कानों के,हौले से सब कह जाऊँगा।
वो गर्माहट मेरी साँसों की,तेरी गर्दन को फिर चूमेगी,
तेरी साँस बहक सी जाएगी,मैं ऐसे इश्क जताऊँगा।
तु शर्मा कर जब जाएगी,मैं पकड़ कलाई खींचूँगा,
तु नज़रें नीचे कर लेगी,शिद्दत से माथा चूमूँगा।
सिंदूर सुहाग निशानी है,कहते होंगे सब लोग भले,
हर साँस में तेरी साँस घोल,रूह से तेरी ब्याह रचाऊँगा।
रोके रखूँगा हँसी अपनी,नादानियाँ तुझसे करवाऊँगा।
जब भी तु मिलने आएगी,मैं रूठा सा बैठ जाऊँगा।
By Aishwarya Sharma

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