ज़िंदगी की किताब
Updated: Dec 2, 2022
By Nidhi Gupta
ज़िंदगी की किताब जो
फुर्सत में कभी पलटने बैठे,
कुछ पन्ने थे खूब रंगीन
कुछ पन्ने थे फटे हुए,
कुछ पन्नों ने हमें हँसा दिया
कुछ पन्नों ने हमें रुला दिया,
कुछ पन्नों ने किसी से मिला दिया
कुछ पन्नों ने किसी से जुदा दिया,
उन पन्नों ने समेटे थे कई अफ़साने
ढेरों किस्से, अपने और बेगाने,
जब आँखें थीं नम और रूह में था गम
पर कोई ना लगाने को मरहम,
हमसफ़र कब अजनबी बन बैठे,
ज़िंदगी की किताब जो, फुर्सत में कभी पलटने बैठे |
By Nidhi Gupta

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