ख़्वाब और हक़ीक़त
By Kanchan Tanwar
तुम ख़्वाब सी
रात के किसी पहर सी
बात के किसी राज सी
सुबह की मीठी नींद सी
कभी हमसफ़र, कभी हमदर्द सी
कभी वजह, कभी बेवजह सी
कभी आँखो की नमी सी
कभी धूप की तपिश सी
कही थोड़ी, कही ज्यादा
कुछ मुझमें, कुछ ज़िन्दगी में
बसती हों
कभी हक़ीक़त, कभी ख़्वाब बन के
By Kanchan Tanwar

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