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ख़याल ७

By Sushmita Sammi


मुहब्बत का दामन हमने आख़िरी दम तक नहीं छोड़ा,

अपनी मुहब्बत का दामन हमने आख़िरी दम तक नहीं छोड़ा;

ये और बात है की तुम अपना रुख़ बहुत पहले ही बदल चुके थे |


By Sushmita Sammi

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