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ख़याल ६

By Sushmita Sammi


तुमने जो सज़ा मुक़र्रर की

हमारे गुनाहों की -२

वो ख़ता हमने की ही नहीं;

हम तेरे मैले मन के साफ़ होने का इंतज़ार करेंगे;

तुमसे राब्ता ना रखें-

जानते हो कितना मुश्किल है-२

हम तेरे वापस लौट कर आ जाने का इंतज़ार करेंगे |

By Sushmita Sammi

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