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ख़याल ४

By Sushmita Sammi


तुम्हारा नाम लिखा करते थे कागज़ों पर हज़ार दफ़ा,

हज़ार दफ़ा पुकार लिया करते थे |

तुमको सोचकर भी कभी-कभी 

हम ख़ुद को संवार लिया करते थे |

सोचते बैठते थे -२ 

तो तेरी तस्वीर ही सौ-सौ बार निहार लिया करते थे |

इतनी बेपरवाह सी थी अपनी मुहब्बत -२

की तेरी बातों की ओट में,

अपना सारा-सारा दिन गुज़ार लिया करते थे |


By Sushmita Sammi


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