हक़ीक़त
By Prashant Lodaya
महफ़िल में जाते ही तंज कसे गए हमपर
सुकून से अभी बैठे ही थे की एजाज़ खो गया
इतने नायाब हैं हम ख़ुशी हुई ये जानकर
के अब भी सब जल जल कर मिलते हैं गोया
कैसे भूल जाते हैं लोग इस कदर इतराकर
के आइना वही दिखाता है जो अंदर है बोया
By Prashant Lodaya

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