"है तुम्हें आमंत्रण"
By Shweta Khati
फूटकर कलियाँ निखरें जब
सुवासित मेरे आँगन में
कलरव मधुर गीत कोई
खग-वृहंग आकर गाएँ
उगते सूरज की लालिमा
जीवन में जब छा जाए ।
है तुम्हें आमंत्रण
सुख की नदियाँ बहने को एक
आतुर बहुत मचल जाए,
फूटें कलियाँ, बिखरें शाखाएँ
घर-आँगन में जब छा जाए ।
है तुम्हें आमंत्रण
हर्ष हो अपार बहुत
उत्कर्ष जीवन में आए,
फुलवारी जीवन की जब
अलंकृत हो शोभा पाए ।
है तुम्हें आमंत्रण
इस क्षण साझा करने को
होता जो मेरे पास बहुत
प्रेम से हर गागर ऐसी
लौटा लेती हर बार बहुत
देख खाली गागर को जो
लौटे हो आज ।
है तुम्हें आमंत्रण ।।
By Shweta Khati

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