हाल ए मोहब्बत
By Tejashree Bhanudas Shitole Ranmale
हाल ए मोहब्बत..
किस किस तरह के लोग मिलते हैं जनाब
इस कमबख्त जहाँ मैं l
सुन तो सबकुछ लेते हैं मगर नाटक ऐसे करते है कि
जैसे हो नींद मैं ll
अपनी तो सब कह देते हैं ज़बरदस्ती से
और हमें सुनने के लिए मजबूर कर देते हैं l
तबियत नासाज़ होने पर भी सबकुछ सुनना पड़ता हैं
क्योंकी उनके आँगन से होकर ही
हमारे इश्क़ का झरना बेहता हैं ll
अब तो सहना हैं हर ज़ुल्म
हर सितम हँस हँस के सिर्फ़ उनके लिए l
ज़िन्दगी जहन्नुम लगे तो भी उसे बदलना हैं हर हाल मैं
ज़न्नत ए मोहब्बत सजानी हैं सिर्फ़ उनके लिए ll
By Tejashree Bhanudas Shitole Ranmale

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