हारना तय था ना
By Harjinder Singh
यह सच है कि अपनी कोशिशों का सिला
मैं हमेशा से जानता था |
पर जिद्दी था बचपन से
ऐसे कहां हार मानता था|
सोचता था एक बार तो जरूरी है कि दिल और दिमाग एक ही घोड़े पर सवार हो
हारने से पहले क्यों हार स्वीकार हो
पर बहुत नुकसान हुआ है इस फसाने में
एक अरसा लग गया अक्ल आने में
अब वक्त की कीमत
विश्वास की अहमियत और
शब्दों के भाव जानता हूं मैं
मेरा हारना तय था ना यहां
तो लो अब खुद हार मानता हूं मैं।
By Harjinder Singh

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