हवाएं तूफानों में तब्दील थी, मगर परिंदे को उड़ना पड़ा।
By Bhagawan Bose
हवाएं तूफानों में तब्दील थी, मगर परिंदे को उड़ना पड़ा।
खता आंखो ने की, दर्द दिल को सहना पड़ा।
कभी आंखों में आंखें डालकर इन आंखो ने बात की थी।
आज इन्ही आंखो से गम के एक दरिया को बहना पड़ा।
बहुत मगरुर था जानकर तेरे हाल ए वफा।
आज उसी वफा को बेवफा कहना पड़ा।
गुजरी है रात की हर एक नींद तेरे सपनो की गवाही में।
उन्ही सपनो से उन रातों को बदनाम कहना पड़ा।
तेरे दिल की दुकान में बेवजह हम ठग लिए गए।
तभी तो तुम्हे दिल का दलाल कहना पड़ा।
कत्ल हुआ हैं हजारों गुलाब का , तेरी मोहब्बत में।
मुझे ही इस कत्ल का गुनहगार ठहरना पड़ा।
बहुत किया इंतजार तेरा उस सुनहरी शाम ने। फिर उस शाम को भी अकेले तन्हा गुजरना पड़ा। सोचा था आज की रात गुजरेगी तेरी खुबसुरत बाहों में। मजबूरन उस रात मधुशाला में ही तड़पना पड़ा। दुनिया के लिए सवेरा हुआ, मेरी आंखो में अंधेरा था। उस सवेरे में, उन अंधेरी आंखों को खुद ही मसलना पड़ा। अब ना होगा इंतजार तेरी बेवफाई का। मर कर भी दुनिया के सामने खुद को जिंदा बतलाना पड़ा।
By Bhagawan Bose

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