हवस का शिकार
Updated: Aug 21, 2025
By Ajana Janu Gaonkar
जिंदगी बड़ी ज़ालिम बन रही है,
नजाने कितनी बेटियां हवस का शिकार हो रही है।
कहता है मर्द है हम
मगर शिकार मासुमों की करता है ।
राम बनकर घुमता है
पर काम शैतानों जैसा करता है
अपनी भूख मिटाने के लिए
नजाने कितने मासुमों को चिरता है ।
गलती थी उनकी
घर से बाहर निकलने की थी
इन हैवानों की नजर
हर जगह छाई हुई थी ।
खुद को मर्द कहता है
और मासुमो के शरीर के साथ खेलता है
एक अपराधी होकर भी
बेखौफ होकर घुमाता है ।
बढ़ रहे हैं दिन-रात
बहु-बेटियों पर अत्याचार
और सब कहते है
बहु-बेटियां सुरक्षित है आज ।
कीसी को काटकर फेंक डाला
तो किसी को मुंह दिखाने लायक नहीं छोड़ा
अरे इन दरिंदों ने तो
छोटी बच्चियों तक नहीं छोड़ा ।
सजा ऐसी मिलनी चाहिए
उन हौवानों की रूह कांप जायें
ये काम करने से पहले
सौ बार सोचना पड़ जाये
ये सिर्फ एक पिडित की
लढाई नहीं है
हर एक बहू -बेटी की
जिम्मेदारी है ।
कब तक चुप बैढेगें
आवाज़ तो उठानी पड़ेगी
तुम खामोश है समझकर
उनकी हिम्मत जरूर बढेगी ।
आज एक है
तो कल हजार होगें
इन दरिंदों के पंख
कल और भी खिलेगें ।
कौन आयेगा तुझे साथ देने
तुम्हें खुद के लिए लड़ना होगा
नारी कोई अबला नहीं
यह भ्रम तुम्हें तोड़ना होगा ।
By Ajana Janu Gaonkar

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