हमसे मिलने से पहले.
By Dr. Shweta Singh
जब तक हम तुमसे मिले न थे..
एहसास हमारे साथ तुम्हारे रहते थे ............
महकी-महकी सी धड़कन थी..
एक बेकरारी सी हरपल में.......... वो ख्वाब तुम्हारी रातों के..
पहचान हमारी होते थे...... उलझी-उलझी सी साँसों में..
वो खुशबू हमसे रहती थी.........
हर करवट से चादरों में..
सिलवटें हमारी रहती थी...............
दिन सोये-सोये रहते थे..
रातें जागी सी रहती थी........
उन् बेताब सी नज़रों की..
हर प्यास हमी से बुझती थी...............
हर अलसाई अंगडाई में..
वो सिमटे-सिमटे हम ही थे....... धुंधली-धुंधली सी शामो में.. अरमान हमी से जगते थे ............... खोयी-खोयी सी आँखों में..
एक इंतज़ार सा रहता था...........
हर राह तुम्हारी मंजिल की.. हमसे ही होकर जाती थी............. हर सोच का रिश्ता हमसे था.. अलफ़ाज़ मे ढलते भी हम थे........ वो दर्द की वज़ह हमसे थी.. और दर्द का मरहम भी हम थे............ हम सांस में थे..एहसास मे थे.. और रूह में पिघले भी हम थे...........
जब तक हम तुमसे मिले न थे..........
एहसास हमारे साथ तुम्हारे रहते थे..........
By Dr. Shweta Singh

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